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द ख़बरी | बिजनेस डेस्क
लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद 9 अक्टूबर को बाजार ने आखिरकार गिरावट का सिलसिला तोड़ा। निफ्टी पिछले सप्ताह की क्लोजिंग से ऊपर बंद हुआ। तेज करेक्शन के बाद साप्ताहिक चार्ट पर लगभग परफेक्ट डोजी कैंडल बनी है, जो बिकवाली करने वालों की कमजोर पड़ती ताकत का संकेत हो सकती है। निफ्टी अगर साप्ताहिक आधार पर 22,780 के ऊपर बंद होता है, तो अच्छी रिकवरी की राह खुल सकती है। लेकिन इस स्तर को पार करने में नाकाम रहने पर फिर बिकवाली बढ़ सकती है। फिलहाल 22,170 का स्तर अहम सपोर्ट है।
जनवरी 2006 में निफ्टी 2,836.80 पर खुला था। इसके बाद तेजी आई और जनवरी 2008 में यह 124% चढ़कर 6,357.10 तक पहुंच गया। लेकिन इसके बाद आई गिरावट ने महज छह महीने में पूरी तेजी खत्म कर दी। अक्टूबर 2008 में निफ्टी गिरकर 2,252.75 पर आ गया। यह अपने शिखर से करीब 64% की गिरावट थी। इंडेक्स जनवरी 2006 के शुरुआती स्तर से भी लगभग 25% नीचे चला गया। इस दौरान PE 28 से गिरकर 10.6 पर आ गया। इतिहास बताता है कि लंबे समय तक चली तेजी कितनी तेजी से बड़ी गिरावट में बदल सकती है। सवाल है कि क्या मौजूदा बाजार में भी ऐसे जोखिम हैं?
जनवरी 2024 से निफ्टी लंबे समय से एक सीमित दायरे में बना हुआ है। जनवरी 2024 में इंडेक्स का उच्चतम स्तर 22,124.15 था, जबकि इस महीने का निचला स्तर 22,179.90 के करीब पहुंचा है। यानी इस अवधि में इंडेक्स ने लगभग कोई बढ़त हासिल नहीं की है। बड़ी तेजी के बाद इतिहास में कई बार बाजार में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन सिर्फ इतिहास के आधार पर अगली गिरावट का समय तय नहीं किया जा सकता। मौजूदा तकनीकी संरचना में 21,743 के नीचे टूटने की आशंका फिलहाल कम दिखती है, हालांकि किसी भी सपोर्ट स्तर के टिके रहने की गारंटी नहीं होती।
पहला संकेत: RSI में डाइवर्जेंस
मंथली चार्ट पर सितंबर 2024 से जनवरी 2026 के बीच RSI डाइवर्जेंस दिखाई देता है। यह बाजार की तेजी के कमजोर पड़ते मोमेंटम का संकेत हो सकता है। इंडेक्स के 21,743 तक पहुंचने पर यह पैटर्न निष्प्रभावी हो सकता है, हालांकि तकनीकी पैटर्न हमेशा किसी तय नियम के अनुसार काम नहीं करते।
दूसरा संकेत: हेड एंड शोल्डर्स पैटर्न
साप्ताहिक और मासिक टाइम फ्रेम के चार्ट पर संभावित हेड एंड शोल्डर्स पैटर्न बनता दिख रहा है। निफ्टी फिलहाल 22,170 के आसपास इसकी नेकलाइन को परख रहा है। यदि इंडेक्स साप्ताहिक आधार पर इस स्तर के नीचे निर्णायक क्लोजिंग देता है, तो गिरावट बढ़कर 21,281 तक पहुंच सकती है। बिकवाली तेज होने पर निफ्टी 18,000 के स्तर की ओर भी जा सकता है। ये संभावित तकनीकी लक्ष्य हैं, निश्चित अनुमान नहीं। इसके उलट, 22,780 के ऊपर साप्ताहिक क्लोजिंग से रिकवरी की उम्मीद मजबूत होगी।
अगले सप्ताह कच्चे तेल, सोने और चांदी की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं, रुपये पर दबाव डाल सकती हैं और भारतीय शेयर बाजार को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके विपरीत, तेल की कीमतों में लगातार गिरावट से बाजार को राहत मिल सकती है।
सोने और चांदी में हाल में रिकवरी आई है। यदि कीमती धातुओं में तेजी जारी रहती है और शेयर बाजार गिरता है, तो यह निवेशकों के बीच बनी अनिश्चितता का संकेत हो सकता है। हालांकि, केवल कमोडिटी की चाल से शेयर बाजार की दिशा का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
निफ्टी के लिए 22,170 का स्तर बचाना बेहद अहम होगा। इसके नीचे टूटने पर मंदी का संकेत मजबूत हो सकता है, जबकि 22,780 के ऊपर टिकाऊ बढ़त रिकवरी की शुरुआत का संकेत दे सकती है। बाजार की दिशा स्पष्ट होने तक सतर्कता बरतना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: लेखक सेबी में पंजीकृत विश्लेषक नहीं हैं और न ही बाजार विश्लेषण के लिए योग्य पेशेवर या विशेषज्ञ हैं। यह लेख केवल सूचना और शैक्षणिक उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे निवेश संबंधी सलाह या किसी सिक्योरिटी को खरीदने-बेचने की सिफारिश न माना जाए। निवेशकों को कोई भी निर्णय लेने से पहले खुद रिसर्च करनी चाहिए और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना चाहिए।