The Khabari
Breaking
🔴 पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती, आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलेगा 🔴 निफ्टी 50 ऐतिहासिक निर्णायक मोड़ पर, 22,170 का स्तर बचाना जरूरी 🔴 बाज़ार विमर्श: 22,945 के ऊपर साप्ताहिक क्लोज़ के बाद ही लौट सकते हैं बुल्स 🔴 निफ्टी 50 में गहराई कमजोरी, फिर भी मिल रहे रिवर्सल के संकेत 🔴 23,452 के ऊपर क्लोजिंग से निफ्टी में तेजी की राह खुलेगी, 23,222 अहम सपोर्ट 🔴 अघोरेश्वर भगवान राम का अवतरण दिवस आज: सेवा को बनाया साधना, कुष्ठ रोगियों को गले लगाकर दिया मानवता का संदेश 🔴 अघोरेश्वर राम के अवतरण दिवस पर मुख्यमंत्री साय ने किया नए विद्यालय भवन का लोकार्पण, बोले- बनोरा आश्रम मानव सेवा को समर्पित 🔴 बेमेतरा में पुलिस की बड़ी लापरवाही? महिला को मृत समझकर कमरे में लगाया ताला, 2 घंटे बाद चल रही थी सांस 🔴 छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर जारी, अगले 7 दिन भी राहत नहीं; रायपुर में बढ़ा तापमान 🔴 बिलासपुर में श्मशान घाट में तंत्र-मंत्र का मामला: चीफ जस्टिस की तस्वीर रखकर डराने की साजिश 🔴 पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती, आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलेगा 🔴 निफ्टी 50 ऐतिहासिक निर्णायक मोड़ पर, 22,170 का स्तर बचाना जरूरी 🔴 बाज़ार विमर्श: 22,945 के ऊपर साप्ताहिक क्लोज़ के बाद ही लौट सकते हैं बुल्स 🔴 निफ्टी 50 में गहराई कमजोरी, फिर भी मिल रहे रिवर्सल के संकेत 🔴 23,452 के ऊपर क्लोजिंग से निफ्टी में तेजी की राह खुलेगी, 23,222 अहम सपोर्ट 🔴 अघोरेश्वर भगवान राम का अवतरण दिवस आज: सेवा को बनाया साधना, कुष्ठ रोगियों को गले लगाकर दिया मानवता का संदेश 🔴 अघोरेश्वर राम के अवतरण दिवस पर मुख्यमंत्री साय ने किया नए विद्यालय भवन का लोकार्पण, बोले- बनोरा आश्रम मानव सेवा को समर्पित 🔴 बेमेतरा में पुलिस की बड़ी लापरवाही? महिला को मृत समझकर कमरे में लगाया ताला, 2 घंटे बाद चल रही थी सांस 🔴 छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर जारी, अगले 7 दिन भी राहत नहीं; रायपुर में बढ़ा तापमान 🔴 बिलासपुर में श्मशान घाट में तंत्र-मंत्र का मामला: चीफ जस्टिस की तस्वीर रखकर डराने की साजिश

Search News

अपनी पसंद की खबर खोजें

मुख्य खबरें छत्तीसगढ़ देश राजनीति बिजनेस समाज अन्य
होम समाज अघोरेश्वर भगवान राम का अवतरण दिवस आज: सेवा को बनाया साधना, कुष्ठ रो...
अघोरेश्वर भगवान राम का अवतरण दिवस आज: सेवा को बनाया साधना, कुष्ठ रोगियों को गले लगाकर दिया मानवता का संदेश
समाज

अघोरेश्वर भगवान राम का अवतरण दिवस आज: सेवा को बनाया साधना, कुष्ठ रोगियों को गले लगाकर दिया मानवता का संदेश

18 September 2026
Share :

रायगढ़। मानवता, सेवा, समानता और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाले पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम का अवतरण दिवस आज 18 सितंबर को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। श्री अघोर गुरु पीठ, बनोरा में अवतरण दिवस के अवसर पर सुबह से धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम होंगे। समारोह का प्रमुख आकर्षण अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर अंग्रेजी माध्यम स्कूल के नवीन भवन का लोकार्पण होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि और वित्त मंत्री एवं स्थानीय विधायक ओपी चौधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगे।

अघोरेश्वर भगवान राम का जीवन मानव सेवा और समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने अघोर साधना को केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे मानव कल्याण से जोड़ा। उनका संदेश था कि पीड़ित मानव की सेवा ही सबसे बड़ी साधना है।

9 साल की उम्र में घर छोड़ा, काशी पहुंचकर साधना की राह चुनी

12 सितंबर 1937 को बिहार के आरा से करीब छह मील दूर गुंडी गांव में बैजनाथ सिंह एवं लखराजी देवी के घर भगवान सिंह का जन्म हुआ। बाल्यकाल से ही उनका झुकाव भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक साधना की ओर था। परिवार के आग्रह के बावजूद साधना के प्रति उनकी रुचि कम नहीं हुई और करीब नौ वर्ष की अल्पायु में उन्होंने घर छोड़ दिया।

इसके बाद वे तीर्थाटन पर निकल पड़े। जगन्नाथपुरी और गया होते हुए काशी पहुंचे। यहां उनकी आध्यात्मिक यात्रा को नई दिशा मिली। जुलाई 1951 में किनाराम स्थल पर अघोर पंथ की दीक्षा लेने के बाद उन्होंने कठोर साधना का मार्ग अपनाया। आगे चलकर यही भगवान सिंह अघोरेश्वर भगवान राम के नाम से प्रसिद्ध हुए।

पीड़ित मानव की सेवा को बनाया जीवन का संकल्प

अघोरेश्वर भगवान राम ने समाज के उपेक्षित और जरूरतमंद वर्गों के प्रति सेवा और अपनत्व का भाव जगाया। उनका मानना था कि किसी व्यक्ति की बीमारी, सामाजिक स्थिति या परिस्थिति उसके सम्मान को कम नहीं करती। 29 सितंबर 1961 को उन्होंने श्री सर्वेश्वरी समूह की स्थापना की। इसके माध्यम से मानव सेवा को संगठित स्वरूप मिला। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और पीड़ित मानव की सहायता से जुड़े कार्यों को संस्था की गतिविधियों में प्रमुख स्थान मिला।

कुष्ठ रोगियों में देखा इंसान, समाज को दिया अपनत्व और सम्मान का संदेश

अघोरेश्वर भगवान राम के जीवन की सबसे उल्लेखनीय सेवा यात्राओं में कुष्ठ रोगियों के प्रति उनका अपनत्व और सेवा प्रमुख रहा। जिस दौर में कुष्ठ रोग को लेकर समाज में भय और दूरी का भाव था, उस समय उन्होंने ऐसे रोगियों को समाज से अलग रखने के बजाय उन्हें अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कुष्ठ रोगियों को केवल दूर से सहायता नहीं दी, बल्कि उन्हें अपने गले लगाया, अपने हाथों से उनकी सेवा की और उनके इलाज में सहयोग किया। जिन लोगों से समाज का एक बड़ा वर्ग दूरी बनाए रखता था, उनके साथ अघोरेश्वर भगवान राम ने आत्मीयता का व्यवहार किया।उनकी इस पहल का उद्देश्य केवल रोगियों की सेवा करना नहीं था, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाना भी था। उन्होंने यह संदेश दिया कि बीमारी किसी इंसान की गरिमा और सम्मान को समाप्त नहीं करती। पीड़ित व्यक्ति को सहानुभूति के साथ-साथ अपनत्व और सम्मान की भी जरूरत होती है।

29 सितंबर 1961 को स्थापित श्री सर्वेश्वरी समूह के माध्यम से इस सेवा भावना को व्यापक स्वरूप मिला। कुष्ठ रोगियों की सेवा से जुड़े उनके कार्यों का उल्लेख गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से भी किया जाता है। आज समूह से जुड़े देश-विदेश में 130 से अधिक शाखा-केंद्र इस सेवा परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

बनोरा, डभरा, शिवरीनारायण, अंबिकापुर, वाराणसी तथा बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर संस्था से जुड़े आश्रमों में सेवा गतिविधियां संचालित की जाती हैं। अघोरेश्वर भगवान राम द्वारा निर्धारित 19 सूत्रीय सिद्धांत इन सेवा गतिविधियों की आधारभूमि हैं।

चमत्कार नहीं, चेतना और कर्म का संदेश

अघोरेश्वर भगवान राम बाहरी चमत्कारों की अपेक्षा मनुष्य के भीतर होने वाले परिवर्तन को अधिक महत्व देते थे। वे व्यक्ति को जागृत, कर्मशील और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने पर जोर देते थे। उनकी शिक्षाओं में यह विचार प्रमुख रहा कि ईश्वर को केवल मंदिरों और मूर्तियों में तलाशने के बजाय प्रत्येक मनुष्य में परमात्मा का अंश देखने की दृष्टि विकसित की जाए। प्रेम, स्वीकार, समानता और सेवा उनके जीवन-दर्शन के महत्वपूर्ण आधार बने। उनका संदेश था—चमत्कार देखने की बजाय स्वयं ऐसा जीवन जिएं, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए। इसी विचार के माध्यम से उन्होंने आध्यात्मिकता को मानव सेवा से जोड़ने का प्रयास किया।

राष्ट्र सेवा को दी प्राथमिकता

अघोरेश्वर भगवान राम के जीवन में राष्ट्र सेवा की भावना भी प्रमुख रही। उनके लौकिक गुरु महाराज श्री राजेश्वर राम जी ने उन्हें क्रीं कुंड के महंत पद पर आसीन करना चाहा था, लेकिन उन्होंने राष्ट्र सेवा के अपने संकल्प को प्राथमिकता देते हुए इस पद को स्वीकार नहीं किया।

समाधि से पूर्व उन्होंने अपनी संस्थाओं और सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए अपने प्रमुख शिष्यों को जिम्मेदारियां सौंपीं। उनका उद्देश्य था कि सेवा और मानव कल्याण की यह परंपरा किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहे।

शिक्षा के जरिए नई पीढ़ी को संस्कार से जोड़ने की पहल
अघोरेश्वर भगवान राम शिक्षा को अज्ञानता के अंधकार को दूर करने का प्रभावी माध्यम मानते थे। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए श्री अघोर गुरु पीठ, बनोरा की ओर से अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर अंग्रेजी माध्यम स्कूल के नवीन भवन का निर्माण कराया गया है।
अवतरण दिवस समारोह में आज इस विद्यालय भवन का लोकार्पण किया जाएगा। विद्यालय के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल को संस्था की सेवा परंपरा को शिक्षा के क्षेत्र तक विस्तार देने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

अवतरण दिवस पर आज बनोरा में दिनभर कार्यक्रम

सुबह 8:00 से 8:30 बजे: गुरु चरण पादुका पूजन
सुबह 8:40 से 9:30 बजे: सामूहिक आरती
सुबह 9:30 से 11:30 बजे: सामूहिक गुरु गीता पाठ एवं हवन
सुबह 10:00 से दोपहर 3:00 बजे: भजन-कीर्तन
दोपहर 12:00 से शाम 4:00 बजे: सामूहिक प्रसाद वितरण
स्कूल भवन का लोकार्पण 3.20 बजे, मुख्यमंत्री करेंगे शिरकत
अवतरण दिवस समारोह के तहत अपराह्न 3 बजे अतिथियों का आगमन एवं स्वागत होगा। 3.10 बजे दीप प्रज्वलन के बाद 3.20 बजे अघोरेश्वर भगवान राम विद्या मंदिर अंग्रेजी माध्यम स्कूल के नवीन भवन का लोकार्पण किया जाएगा। इसके बाद विद्यार्थियों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
शाम 4:00 बजे: विद्यार्थियों का सांस्कृतिक कार्यक्रम
शाम 4:45 बजे: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का उद्बोधन एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी का संबोधन
शाम 5:30 बजे: परम पूज्य बाबा जी का आशीर्वचन
शाम 6:00 बजे: आभार प्रदर्शन
श्री अघोर गुरु पीठ, बनोरा में अघोरेश्वर भगवान राम के अवतरण दिवस समारोह और विद्यालय भवन लोकार्पण कार्यक्रम में बड़ी श्रद्धालुओं, धर्मबंधुओं एवं माताएं शामिल होंगे।